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कलकत्ता वीथी

लार्ड कर्जन ने कलकत्ता वीथी, भारत में महानगर पर प्रथम वीथी, को बनाने की परिकल्पना की थी। इसके बाद सन्‌ 1970 के मध्य में भारत के तत्कालीन शिक्षा मंत्री प्रोफेसर नुरूल हसन ने इस पर नये सिरे से पहल की। सन्‌ 1986 में प्रोफेसर हसन पश्चिम बंगाल के राज्यपाल तथा विक्टोरिया मेमोरियल हाल के ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष बने। उन्होंने विक्टोरिया मेमोरियल को कोलकाता में अकादमी एवं संस्कृति का केन्द्र बनाने के लिए प्रयत्न शुरू किया। नवम्बर 1988 में उन्होंने कलकत्ता त्रिशताब्दी के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य पर एक अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी में इस पर मंथन करने के लिए विशेषज्ञों को आमंत्रित किया। इसमें प्रत्येक ने विक्टोरिया मेमोरियल हाल में कलकत्ते पर एक स्थाई वीथी बनाने की पहल का स्वागत किया। कलकत्ता वीथी उप समिति के डा. असीन दासगुप्ता तथा डा. बरूण दे ने वीथी की डिजाइन की अवधारणा तैयार की और राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान के निदेशक श्री विकास सतवालकर ने इस कार्य के निरीक्षण में मदद की। मेसर्स टैंगराम डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड के श्री त्रिदिवेश सान्याल तथा श्री सिद्धार्थ घोष के मार्गदर्शन में यह वीथी तैयार की गई। मेसर्स मैक्निल एंड मैगार के श्री बी. एम. खेतान ने वीथी के वातानुकूलन को प्रायोजित किया। इन सभी के अलावा विक्टोरिया मेमोरियल हाल के तत्कालीन सचिव एवं संग्रहाध्यक्ष डा. हीरेन चक्रवर्ती ने इस संपूर्ण कार्य की देखरेख की थी।

 

कलकत्ता वीथी में जॉब चारनाक से लेकर सन्‌ 1911 में राजधानी का दिल्ली में स्थानान्तरण तक के कोलकाता के इतिहास एवं उसके विकास को दर्शाया गया है।

 

वीथी में 19वीं सदी के चितपुर रोड की एक पूर्ण आकार की झांकी भी प्रस्तुत की गई है। उन दिनों चितपुर रोड मुख्य बाजार हुआ करता था, जिसे आज बड़ाबाजार कहा जाता है।

Victoria Memorial Hall,Kolkata offers visitors free guided tours (35 - 40 Minutes) through the museum galleries [ Timings 10:00AM, 11:00AM, 12:00 PM, 1:00PM, 2:00PM, 3:00PM, 4:00PM, 5:00PM ]