Great Indian Reformer Gallery

Bal Gangadhar Tilak

bal gangadhar tilak

তৈলচিত্র
শিল্পী: ভি.এ. মালি
कैनवास पर तेल चित्र
कलाकार: भी. ए. माली
Oil on Canvas
Artist: V.A. Mali
R3024

বাল গঙ্গাধর তিলক (1856-1920)

বাল গঙ্গাধর তিলক একজন কট্টর জাতীয়তাবাদী, শিক্ষক এবং সাংবাদিক ছিলেন। তিনি ব্রিটিশ ঔপনিবেশিক শাসনের বিরুদ্ধে জনসাধারণকে জাগিয়ে তুলতে গুরুত্বপূর্ণ ভূমিকা পালন করেছিলেন। ভারতীয় জাতীয় কংগ্রেসের অন্যতম প্রধান স্থপতি ছিলেন তিনি। পরবর্তীকালে ব্রিটিশ শাসনের বিরুদ্ধে আরও দৃঢ় পদক্ষেপের উদ্দেশ্যে উগ্রপন্থী দল গঠনের জন্য নিজের পথ বিচ্ছিন্ন করে নেন। রেন্ড বিচারের পর, তিনি সম্মানজনক ‘লোকমান্য’ উপাধি, যার অর্থ ‘জনগণ তাদের নেতা হিসাবে যাকে গ্রহণ করেছেন’ দ্বারা ভূষিত হন। মহাত্মা গান্ধী তাঁকে ‘আধুনিক ভারতের নির্মাতা’ বলে অভিহিত করেছিলেন। ভারতীয় সংস্কৃতি ও শিক্ষার প্রচারের জন্য তিলকের প্রচেষ্টা দেশের ইতিহাসের অবিচ্ছেদ্য অঙ্গ হয়ে রয়েছে।

আপনি কি জানেন ?  

তিনি ১৯১৬ সালে স্লোগান তুলেছিলেন, ‘স্বরাজ (স্বাধীনতা) আমার জন্মগত অধিকার এবং আমি তা অর্জন করব’।

बाल गंगाधर तिलक (1856-1920)

बाल गंगाधर तिलक एक पक्के राष्ट्रवादी, शिक्षक और पत्रकार थे। उन्होंने औपनिवेशिक शासन के खिलाफ जनता को एकजुट करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रमुख निर्माताओं में से एक थे, लेकिन आगे चलकर उन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ अधिक मुखर उपायों की वकालत करते हुए चरमपंथी गुट बनाने के लिए अपना रास्ता अलग कर लिया। रैंड की प्रयत्न के बाद, उन्हें सम्मानजनक उपाधि ‘लोकमान्य’ से सम्मानित किया जाने लगा, जिसका अर्थ है- ‘लोगों द्वारा उनके नेता के रूप में स्वीकार किया गया’। महात्मा गांधी ने उन्हें “आधुनिक भारत का निर्माता” कहा था। भारतीय संस्कृति और शिक्षा को बढ़ावा देने वाले तिलक के प्रयास देश के इतिहास का अभिन्न अंग बने हुए हैं।

क्या आप जानते हैं ?

बाल गंगाधर तिलक ने सन् 1916 ई. में नारा दिया था- “स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और हम उसे लेकर रहेंगे।”

Bal Gangadhar Tilak (1856-1920)

A staunch nationalist, teacher and journalist, Tilak played a crucial role in galvanizing the masses against British colonial rule. He was one of the key architects of the Indian National Congress, but later parted ways to form the extremist faction advocating more assertive measures against British rule. After the Rand trial, he came to be revered with the honorific ‘Lokmanya’, meaning ‘accepted by the people as their leader’. Mahatma Gandhi called him “The Maker of Modern India”. Tilak’s effort to promote Indian culture and education remains integral to the country’s history.

Did you know?
He raised the slogan, “Swaraj (Freedom) is my birthright and I shall have it” in the year 1916.

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Site Updated On

July 20, 2024