Great Indian Reformer Gallery

Khudiram Bose

Khudiram Bose

তৈলচিত্র
শিল্পী: অলোক ভট্টাচার্য
कैनवास पर तेल चित्र
कलाकार: आलोक भट्टाचार्जी
Oil on Canvas
Artist: Aloke Bhattacharjee
R7966

ক্ষুদিরাম বসু (1889-1908)

ক্ষুদিরাম বসু ছিলেন বাংলার কনিষ্ঠতম শহীদ বিপ্লবী। চিফ প্রেসিডেন্সি ম্যাজিস্ট্রেট ডগলাস কিংসফোর্ডকে বিহারের মুজাফফরপুরে হত্যার প্রচেষ্টার জন্য ক্ষুদিরাম বসু স্মরণীয়। মুজাফফরপুর ষড়যন্ত্র মামলায় তাঁর ভূমিকার জন্য, প্রফুল্ল চাকির সাথে তাঁকেও মৃত্যুদণ্ড দেওয়া হয়েছিল। তাঁর এই সাহসিকতা ভারতবাসীর মধ্যে জাতীয়তাবাদের উন্মাদনা ছড়িয়ে দেয় এবং ব্রিটিশ শাসনের বিরুদ্ধে লড়াইয়ে  যোগদানে অনুপ্রাণিত করে। ক্ষুদিরাম বসুর এই আত্মত্যাগ তাঁকে তারুণ্য ও সাহসিকতার প্রতীক হিসেবে অমর করে রেখেছে।

আপনি কি জানেন ?  

ক্ষুদিরাম বসু তাঁর ১৬ বছর বয়স থেকেই, পুলিশ থানা ও সরকারি দপ্তরের কাছে বোমা পুঁতে রাখতে অংশগ্রহন করতেন।

खुदीराम बोस (1889-1908)

बंगाल प्रेसिडेन्सी के सबसे युवा क्रांतिकारियों में से एक खुदीराम बोस को सन् 1908 ई. में बिहार के मुजफ्फरपुर के मुख्य प्रेसिडेन्सी मजिस्ट्रेट डगलस किंग्सफोर्ड की हत्या करने के उनके साहसी प्रयास के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है। मुजफ्फरपुर षड़यंत्र मामले में उनकी भूमिका के लिए, प्रफुल्ल चाकी के साथ उन्हें मृत्यु दंड सुनाया गया और बाद में उन्हें फांसी दे दी गई, जिससे वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे कम उम्र के शहीद कहलाए। हालांकि उनके साहसी कार्य असफल रहे, पर इन कार्यों ने राष्ट्रवादी उत्साह जगाने का प्रयास किया तथा कई लोगों को ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। खुदीराम बोस के त्याग और साहस ने उन्हें पराक्रमी युवा के रूप में अमर बना दिया।

क्या आप जानते हैं ?

16 वर्ष की उम्र से ही खुदीराम बोस ने पुलिस स्टेशन के पास बम लगाने और सराकरी अधिकारियों को निशाना बनाने में हिस्सा लिया।

Khudiram Bose (1889-1908)

One of the youngest revolutionaries from the Bengal Presidency, Khudiram Bose is best remembered for his daring attempt in 1908, to assassinate Chief Presidency Magistrate, Douglas Kingsford, in Muzaffarpur, Bihar. For his role in the Muzaffarpur Conspiracy case, along with Prafulla Chaki he was sentenced to death and subsequently executed, making him the youngest martyr of the Indian Independence movement. His courageous act, though unsuccessful, sparked nationalist fervour and inspired many to join the fight against British rule. Bose’s sacrifice and bravery have immortalized him as a symbol of youthful courage.

Did you know?

From the tender age of 16, Khudiram took part in planting bombs near police stations and targeted government officials.

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Site Updated On

July 20, 2024